दो दिन पहले एक आदमी ने अपनी पत्नी को ज़िंदा जला दिया जब कि उसकी पत्नी एक बच्चे को जन्म देने वाली थी। उसे जलाया गया सिर्फ इसलिए कि वो अपने साथ दहेज़ लेकर नहीं आई थी। इसी तरह एक लड़की ने अपनी शादी के दस दिन बाद खुदखुशी कर ली क्योंकि ये शादी उसकी मर्ज़ी के खिलाफ थी और साथ ही उसका पति दहेज़ को लेकर ताने देने वाला और शक्की नेचर का था। अपने पति के दहेज़ को लेकर और शादी के पहले की ज़िन्दगी को लेकर ताने मारने की वजह से उसने खुदखुशी कर ली।
समझ नहीं आता के लोग इतनी छोटी सोच के कैसे हो सकते है। एक पति जिसने एक लड़की के साथ फेरे लिए, सात वचन लिए और वो लड़की सिर्फ उस लड़के के साथ एक रिश्ते में बंध कर उसके भरोसे पर अपने घर को छोड़ कर आई अपनों को छोड़ कर आई जिस आँगन में वो पलती है बड़ी होती है पर शादी के बाद वही घर उसके लिए गैर का हो जाता है। यकीं नहीं होता कि एक पति जो खुद किसी का बेटा है अपनी पत्नी को जो माँ बनने वाली है आग के हवाले कर देता है और खबर ये फैलाता है कि सिलेंडेर ब्लास्ट हो गया। वही एक और पति खुद चाहे शादी से पहले कितने घाट घुमे हो पर पत्नी उन्हें सीता जैसी चाहिए।
दहेज़ के मामले में ये लोग अपाहिज होते है खुद से कुछ कर ही नहीं सकते तो दहेज़ लाने के लिए अपनी पत्नियो को परेशान करते है।
पता नहीं इस देश में ऐसा कब होगा कि कम से कम दहेज़ को लेकर इस तरह की हत्ताये और आत्महत्ताये ख़त्म हो जाएँगी।
समझ नहीं आता के लोग इतनी छोटी सोच के कैसे हो सकते है। एक पति जिसने एक लड़की के साथ फेरे लिए, सात वचन लिए और वो लड़की सिर्फ उस लड़के के साथ एक रिश्ते में बंध कर उसके भरोसे पर अपने घर को छोड़ कर आई अपनों को छोड़ कर आई जिस आँगन में वो पलती है बड़ी होती है पर शादी के बाद वही घर उसके लिए गैर का हो जाता है। यकीं नहीं होता कि एक पति जो खुद किसी का बेटा है अपनी पत्नी को जो माँ बनने वाली है आग के हवाले कर देता है और खबर ये फैलाता है कि सिलेंडेर ब्लास्ट हो गया। वही एक और पति खुद चाहे शादी से पहले कितने घाट घुमे हो पर पत्नी उन्हें सीता जैसी चाहिए।
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