Sunday, 7 January 2018
तलाक़ को तलाक़ दे दो...
हैलो जी ! आदाब! एक बार फिर हाज़िर हू...क्या करे इस मुये तलाक़ के टॉपिक ने दिमाग मे तांडव जो मचा रखा है। सच कहूं तो कुछ लोगो ने तलाक़ के बारे में कुछ कहने से भी तलाक़ ले रखा है।
अब जैसे हमारे दूर के पड़ोसी मोहसिन साहब को ही ले लीजिए। इक्कीसवीं शताब्दी के इस प्रोग्रेसिव इंडिया में जिसे मोदी जी स्मार्ट इंडिया बनाने में जी जान से जुटे है। ये लोग फ़तवा ले कर उसके भजन कीर्तन कर रहे है।दसवी क्लास में पढ़ने वाली 15 साल की बच्ची आलिया जिसने एक श्लोक प्रतियोगिता जीतने के श्लोको का पाठ मंच पर किया।पाठ किया इस पर आपत्ति फिर उसने भगवान कृष्ण की पोशाक पहनी इस पर भी आपत्ति।मुस्लिम धर्म गुरुओं ने इस बात का इतना बड़ा बवाल कर दिया और फ़तवा भी जारी कर दिया कि वो इस प्रकार से किसी दूसरे धर्म की प्रसंशा नही कर सकती । उस बेचारी छोटी बच्ची को बकायदा कहना पड़ा कि "प्लीज़ मुझे राजनीति में न लाये मेरी दसवी की परीक्षा है मुझे पड़ने दिया जाए।" इस फ़तवे को मोहसिन साहब ठीक ठहरा रहे है वही उनकी बेगम साहिबा ने कहा दिया कि "नही ये तो सरासर ग़लत है ये फ़तवा आज के ज़माने में मानता कौन है और कितने ही फ़तवे रोज़ आते है।" अब आप ही बताये एक तरफ तो तीन तलाक बिल पास नही हो रहा और यहा घर पर ही महाभारत शुरू हो गयी।
अरे भई रही बात फ़तवे की तो इस बात पर भी फ़तवा आया कि "किसी बैंकर से शादी न करो" अब बताये यहाँ मिडिल क्लास आदमी तो यही चाहता है कि भईया लड़का सरकारी नोकरी ज़रूर करता हो फिर चाहे वो बैंकर हो पुलिस हो या फ़ौजी। अब इन फ़तवे जारी करने वालो को कौन समझाए कि मिडिल क्लास आदमी मिडिल क्लास आदमी होता है फिर चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम। और ये बात समझ नही आती है जब भी कोई मुद्दा उठता है तो बात घुमाफिरा कर औरतो पर आती है और फ़तवे भी सिर्फ औरतो के खिलाफ ही क्यों निकलते है कभी इस बात पर भी फ़तवे निकालिये की जो भी औरतों से बदसलूकी करेगा तो उसका.......( जो भी फ़तवे वाले मौलवी साहब भरना चाहे।)हर बार हर गुनाह के लिए औरतों को ही क्यों बलि का बकरा बनना पड़ता है। हर बार औरतों के लिए ही क्यों इतने नियम बनाये जाते है या ये समाज इतना डरता है औरतो से की अगर एक औरत अपनी में आ गयी तो इस समाज की सत्ता ही पलट जायगी इसलिए उसे नियमो की फतवो की बेड़ियों से जकड़ कर रखो। उसमे शंका बनी रहनी चाहिये क्योंकि यदि नारी ने शंका त्याग दी तो स्वयं शंकर हो जाएगी।खुद विचार कीजिये।
अदिति वर्मा
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