नारी....एक ऐसा शब्द जिसको कई बार मुख़्तलिफ़ तरह से परिभाषित करने की कोशिश की गयी। कभी रामायण की सती सावित्री सीता के रूप में, कभी महाभारत की कुंती और द्रौपदी, कभी श्याम की राधा या मीरा हो या कि हो सूर की गोपियाँ। सभी ने अपने-अपने हिसाब से नारी को समाज में दिखाया।
एक बात हर किसी की रचना में थी कि एक औरत के जितना प्यारा और वफादार कोई नहीं होता पर कभी-कभी उसका खतरनाक रूप भी इन रचनाओ में देखने को मिला जो कही न कही उस वक़्त के समाज को परिभाषित करता है। देखा जाए तो एक औरत अपनी ज़िन्दगी में कितने सारे रिश्ते निभाती है और सारे के सारे बशर्ते प्यार, विश्वास और वफ़ा पर टिके होते है बचपन में बेटी, बहन, भतीजी, दोस्त फिर एक पत्नी, भाभी, माँ, दादी हो या नानी सारे रिश्तों में बंधकर भी प्यार लुटाती नज़रे होती है।
ये सिर्फ साहित्य या कहानी में पकाया ख्याली पुलाव नहीं है बल्कि एक सच्चाई है। इस पुरुष प्रधान समाज में एक औरत के लिए तथा कथित परिवार जैसी चीज़ पर अपना सब कुछ लुटाती है जबकि वो परिवार उसे न तो प्यार देता है न सम्मान देता है। बल्कि बदले में उसे मिलती है केवल हार घृणा, अत्याचार और कई अनकहे ज़ुल्म। कितना भी वो प्यार लुटाए.....वफ़ा करे...पर क़िस्मत में आएगी सिर्फ अग्निपरीक्षा....किसी ने बिल्कुल सही कहा है......
"जब से सीता गुज़री आग से
तब से वफ़ा के पाँव जख्मी है "
एक बात हर किसी की रचना में थी कि एक औरत के जितना प्यारा और वफादार कोई नहीं होता पर कभी-कभी उसका खतरनाक रूप भी इन रचनाओ में देखने को मिला जो कही न कही उस वक़्त के समाज को परिभाषित करता है। देखा जाए तो एक औरत अपनी ज़िन्दगी में कितने सारे रिश्ते निभाती है और सारे के सारे बशर्ते प्यार, विश्वास और वफ़ा पर टिके होते है बचपन में बेटी, बहन, भतीजी, दोस्त फिर एक पत्नी, भाभी, माँ, दादी हो या नानी सारे रिश्तों में बंधकर भी प्यार लुटाती नज़रे होती है।
ये सिर्फ साहित्य या कहानी में पकाया ख्याली पुलाव नहीं है बल्कि एक सच्चाई है। इस पुरुष प्रधान समाज में एक औरत के लिए तथा कथित परिवार जैसी चीज़ पर अपना सब कुछ लुटाती है जबकि वो परिवार उसे न तो प्यार देता है न सम्मान देता है। बल्कि बदले में उसे मिलती है केवल हार घृणा, अत्याचार और कई अनकहे ज़ुल्म। कितना भी वो प्यार लुटाए.....वफ़ा करे...पर क़िस्मत में आएगी सिर्फ अग्निपरीक्षा....किसी ने बिल्कुल सही कहा है......
"जब से सीता गुज़री आग से
तब से वफ़ा के पाँव जख्मी है "