हम है ग़म है...
ग़म ही हमसफ़र है.....
अब सब है और मैं हूँ....
सब मतलब के साथी है.....
बस आगे बढ़ते जाना है......
मन्ज़िल को बस पाना है......
जितने ग़म है उतनी मैं हूँ......
मैं...उलझन...मरहला....
सब है मेरे ही रूप.....
या कहू के सब है मुझमें.....
इबादत..परिश्तिष्....अल्लाह....
सब है उसके ही रूप.....
मैं हूँ अदना सी शख़्सियत.....
तेरे आगे क्या बिसात मेरी हैं....
तुझसे ही मैं हूँ.....
मेरा वजूद मेरा ग़म हैं.....
और मेरा ग़म ही मेरा हमसफ़र हैं...
तू अल्लाह है तू ईश्वर है...
तू ही मेरा कृष्णा है......
तू दोस्त मेरा हमनवा मेरा....
अब मैं हूँ तू हैं......
और तू ही मेरा हमसफ़र हैं......
ग़म ही हमसफ़र है.....
अब सब है और मैं हूँ....
सब मतलब के साथी है.....
बस आगे बढ़ते जाना है......
मन्ज़िल को बस पाना है......
जितने ग़म है उतनी मैं हूँ......
मैं...उलझन...मरहला....
सब है मेरे ही रूप.....
या कहू के सब है मुझमें.....
इबादत..परिश्तिष्....अल्लाह....
सब है उसके ही रूप.....
मैं हूँ अदना सी शख़्सियत.....
तेरे आगे क्या बिसात मेरी हैं....
तुझसे ही मैं हूँ.....
मेरा वजूद मेरा ग़म हैं.....
और मेरा ग़म ही मेरा हमसफ़र हैं...
तू अल्लाह है तू ईश्वर है...
तू ही मेरा कृष्णा है......
तू दोस्त मेरा हमनवा मेरा....
अब मैं हूँ तू हैं......
और तू ही मेरा हमसफ़र हैं......
No comments:
Post a Comment