Wednesday, 8 April 2015

मुख़्तलिफ़ है चॉक की दास्ताँ.....

चॉक......एक ऐसा शब्द जिसे शायद ही कोई ना जानता हो। चॉक जो छोटे बच्चों के लिए लिखने का जरिया है टीचर्स के लिए समझाने का तरीका। चॉक को तरह-तरह के लोग अपने-अपने हिसाब से समझते है।
पहले बात करते है उसके रंग पर...पहले चॉक जब सिर्फ सफ़ेद रंग की होती थी। सफ़ेद रंगत ब्लैकबोर्ड पर लिखी जाती है तो साफ़-साफ़ दिखता है। ब्लैक जो की हमेशा से बुराई का प्रतीक माना गया और सफ़ेद जो हमेशा सच्चाई और अच्छाई का सिंबल माना गया यानी कोई चीज कितनी भी बुरी हो उसे अच्छाई से अच्छा और बेहतर किया जा सकता है। एक नज़रिया ये था तो दूसरा नज़रिया ये है क़ि अगर हमारी ज़िन्दगी चॉक और डस्टर जैसी होती तो कितनी अच्छा होता। चॉक की तरह ही ज़िन्दगी भी हमें बहुत से हादसों से, खुशियो से, ग़लतियो से, अच्छाई से और बहुत सी बातो से नवाज़ती जाती है और जो चीज़े हमें पसंद न होती, जिन्हें हम भूल जाना चाहते अपनी ज़िन्दगी से उनका नाम-ओ-निशाँ मिटा देना चाहते है अगर हमारी ज़िन्दगी में डस्टर जैसी कोई चीज़ होती तो हम अपनी ज़िन्दगी से सारे बुरे हादसे मिटा देते और चॉक की मदद से अच्छे खूबसूरत यादें जोड़ लेते। अगर ऐसा होता तो कितना अच्छा होता।
ख़ैर नज़रिये की बात तो सब करते है पर आज हम याद करेंगे कुछ पुराने ख़ास पलो को जो पूरी तरह से चॉक से जुड़े होंगे। सबसे पहले बात करते है एक टीचर की। एक टीचर की लाइफ में चॉक की बड़ा इम्पोर्टेन्ट रोल होता है। हालांकि जबकि मार्कर्स वज़ूद में आये है तब से चॉक की इम्पोर्टेंस कम हो गयी है। पर टीचर्स की कई तरह की यादें चॉक से जुड़ी है मसलन चॉक ख़त्म हो जाने पर दूसरे क्लास से चॉक मंगाना या फिर जब चल रही हो एक इंटरेस्टिंग क्लास और टीचर को दिख जाये नींद में एक स्टूडेंट, फिर क्या उसकी तो शामत समझो और हाथ में पकड़ा चॉक का एक टुकड़ा उस बेचारे नींद से मज़बूर लड़के के सर से टकराया और वो हड़बड़ा के उठ बैठा अब तो क्लास लगने की बारी उसकी। ये तो हुई एक टीचर की बात पर बच्चे  तो इसके बारे में उलट ही सोचते है वो चॉक को सिर्फ पढाई तक ही सीमित नहीं रखते है। छोटी क्लास में पढ़ने वाले बच्चे चॉक से कुछ सीखते है उनसे थोड़े बड़े बच्चे ब्लैकबोर्ड को चॉक से रंगते भी है। कुछ महारथी चॉक को चखने से भी नहीं चूकते है इसीलिए वो स्कूल से चॉक चुरा भी ले जाते है तो कभी-कभी चॉक को घिस-घिस कर उसका बुरादा बनाकर अपने दोस्तों को रंगने की कोशिश भी करते है। कुछ क्रिएटिव और कलाकार लोगो के लिए सफ़ेद चॉक से लेकर रंग-बिरंगी चॉक तक, उन सब को मिलाकर खूबसूरत पेंटिंग तक बना देते है। उन कलाकार लोगो में से कुछ लोग चॉक से सड़को पर चौराहो पर ऐसी पेंटिंग बनाते है कि देखने वाले देखते रह जाए ऐसे कई पेंटर देश-विदेश में है।
 अब बात करे लोकल सड़कछाप महान पैंटर्स की..इन्हें पेंटर कहना ही पेंटर का अपमान होगा पर हा इन्हें सड़कछाप आशिक़ या रोमियो कहना ज्यादा मुनासिब होगा क्योंकि ये कुछ ऐसे लोग जो सड़को पर, लोगो की घरो की दीवारो पर, यहाँ तक की पेड़ो पर और हिस्टोरिकल जगहों पर चॉक से बड़ा सा दिल बनाएंगे और उसमे तीर भी बनाएंगे फिर अपना और अपनी बेग़म का नाम लिखेंगे दुनिया को अपनी मोहब्बत का सबूत देंगे की उ से बड़ा तीसमारखां कोई नहीं है। एक महज़ चॉक से दीवार पर अपना नाम लिखकर खुद को तसल्ली देते है वो ताजमहल नहीं बनवा सकते तो क्या हुआ उसमे नाम लिखकर ही जग जाहिर कर दे। हे चॉक तू किन-किन लोगो के काम आती है और सबके काम बनाती है वाह रे चॉक तेरी महिमा अपरम्पार है।

1 comment:

  1. Well said .....logo ko cheeze bigadne aati hai sawarne nh.....

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