ये जो बेमौसम की बरसात है....
किसी के लिए ख़ुशी किसी के लिए रात है....
मोहब्बत में डूबे शख्श के लिए....
रूमानी खुमार है....
हिज्र से मुख़ातिब शख्श के लिए....
यादो की खूबसूरत महफ़िल है....
वो यादें जो एक रोज़ गुज़ारी थी....
वो बाते जो एक शाम का हिस्सा थी.....
एक अल्हड़ सी लड़की के लिए.....
मिट्टी की खूश्बू थी बारिश....
एक दीवाने से लड़के की खातिर....
उसकी दिलरुबा थी बारिश...
चेहरे पर पड़ती बूंदों का....
अहसास था अनोखा सा....
पर सबके लिए ये खूबसूरत न था....
इस धरती को सवांरने वाले....
देवताओं के लिए था बुरा ख़्वाब....
इसी बारिश ने जहाँ एक तरफ....
किसी को अपनो की याद दिलाई....
तो इन किसानो के लिए ले आई मौत का इंतज़ाम...
किसी के लिए बहार लायी....
और इन बेचारो के लिए तबाही का सैलाब....
कितनो ने चाहा कि ये बरसात....
यूँ ही बरसती रहे....
और कितनो ने मांगी मन्नते....
ये बरसात यही थम जाए....
बारिश के साथ पड़ते ओलो ने....
कितनो को ठण्ड का रूमानी अहसास कराया....
और कितनो को आने वाले संकट.....
ग़रीबी, बेचारगी का अहसास कराया...
कितनो ने आने वाली ज़िन्दगी के....
सपने संजोये...सवाँरे...
और कितनो ने अपनी ज़िन्दगी.....
को ख़त्म किया...
कितनो ने जशन मनाया इस मौसम का....
पर कईयो ने मातम मनाया....
इस बेमौसम बरसात का....
ये जो बेमौसम की बरसात है...
किसी के लिए ख़ुशी किसी के लिए रात है.....
किसी के लिए ख़ुशी किसी के लिए रात है....
मोहब्बत में डूबे शख्श के लिए....
रूमानी खुमार है....
हिज्र से मुख़ातिब शख्श के लिए....
यादो की खूबसूरत महफ़िल है....
वो यादें जो एक रोज़ गुज़ारी थी....
वो बाते जो एक शाम का हिस्सा थी.....
एक अल्हड़ सी लड़की के लिए.....
मिट्टी की खूश्बू थी बारिश....
एक दीवाने से लड़के की खातिर....
उसकी दिलरुबा थी बारिश...
चेहरे पर पड़ती बूंदों का....
अहसास था अनोखा सा....
पर सबके लिए ये खूबसूरत न था....
इस धरती को सवांरने वाले....
देवताओं के लिए था बुरा ख़्वाब....
इसी बारिश ने जहाँ एक तरफ....
किसी को अपनो की याद दिलाई....
तो इन किसानो के लिए ले आई मौत का इंतज़ाम...
किसी के लिए बहार लायी....
और इन बेचारो के लिए तबाही का सैलाब....
कितनो ने चाहा कि ये बरसात....
यूँ ही बरसती रहे....
और कितनो ने मांगी मन्नते....
ये बरसात यही थम जाए....
बारिश के साथ पड़ते ओलो ने....
कितनो को ठण्ड का रूमानी अहसास कराया....
और कितनो को आने वाले संकट.....
ग़रीबी, बेचारगी का अहसास कराया...
कितनो ने आने वाली ज़िन्दगी के....
सपने संजोये...सवाँरे...
और कितनो ने अपनी ज़िन्दगी.....
को ख़त्म किया...
कितनो ने जशन मनाया इस मौसम का....
पर कईयो ने मातम मनाया....
इस बेमौसम बरसात का....
ये जो बेमौसम की बरसात है...
किसी के लिए ख़ुशी किसी के लिए रात है.....
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